INNOVATIVE APPROACH OF INCLUSIVE EDUCATION (HINDI MEDIUM)
समावेशी शिक्षा हेतु नवीन उपागम
भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 राममूर्ति कमेटी 1992 यूनिसेफ आदि संस्थाओं ने समाजिक समावेशी शिक्षा के विकास हेतु नवीन उपागम का बढ़ावा दिया है इस कमेटी ने शारीरिक रूप से बाधित बालकों की समस्याओं पर विचार करते हुए निम्न सुझाव दिए हैं:---
*दिव्यांग जनों की समस्याओं के संबंधों में सभी को ज्ञान कराया जाए ।इसके लिए समस्त माध्यमों जैसे समाचार पत्र, टीवी, रेडियो तथा विभिन्न संप्रेषण विभागों का सहयोग लेना चाहिए।
*जिस परिवार में कोई शारीरिक या मानसिक दिव्यांग हो ऐसे परिवार को सरकार द्वारा पूर्ण रूप से सहायता करनी चाहिए तथा ऐसे परिवारों से दिव्यांग के संबंध में बातचीत करना, परिवार वालों को विशेष प्रशिक्षण देना तथा समय-समय पर बाधित बालकों का मूल्यांकन भी करना चाहिए ।
*इन बालकों की शिक्षा व्यवस्था लचीली होनी चाहिए जिससे बालकों में सीखने की पूरी रुचि बना रहे।
*इन बालकों की शिक्षा सामान्य स्कूलों में अथवा समान्य स्कूलों की विशिष्ट कक्षाओं में तथा समन्वित व्यावसायिक शिक्षा केंद्रों पर होनी चाहिए।
*विकलांग बालकों को समावेशी शिक्षा हेतु शिक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में विधियों का समावेश होना चाहिए ।
*समावेशी शिक्षा हेतु एक संसाधन युक्त विभाग होना चाहिए जो शिक्षकों को उपयुक्त प्रशिक्षण तथा नवीन के विधियों आयामों से अवगत करा सकें।
*विकलांगों हेतु अनुसंधान कार्य करते रहना चाहिए जो इनकी सहायता के लिए उपयोग किया यंत्र,यंत्र कला तथा नई-नई प्रविधियों को उपलब्ध करा सके।
*श्रवण बाधित बालकों हेतु उनकी बातों को ध्यान में रखकर ही उचित शिक्षा का प्रारूप तैयार करना चाहिए संबंधित कार्यक्रम कुछ इस प्रकार से बनाए जाने चाहिए जो उनकी भावुकता विचार भावना तथा भाषा के विकास में उपयोगी हो।
*श्रवण बाधित बालक एवं बालिकाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने हेतु व्यवसाय प्रशिक्षण देने हेतु विशेष व्यवसाय प्रशिक्षण की व्यवस्था हो।
*विशेष बच्चों की प्रारंभिक स्तर पर ही पहचान कर उनके लिए विशेष कार्यक्रम बनाना।
*ऐसे बालक जो शारीरिक एवं मानसिक दोष से युक्त हैं तथा सामान्य शिक्षा संस्थाओं में शिक्षा प्राप्त करने के योग्य नहीं है यदि सामान्य शिक्षा में उन्हीं सामान्य बालकों के साथ उन्हें शिक्षा दी जाती है तो वह हीन भावना से ग्रसित हो जाते हैं उन्हें इस स्थिति से बचाना है।
*सामान्य विद्यालयों में विशेष शिक्षा में कार्यक्रमों में उपयोग आने वाले संसाधन के रूप में सेवाएं उपलब्ध कराएं। विशिष्ट बालकों की पूर्ण रूप से सामान्य शिक्षा व्यवस्था पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने विभिन्न श्रेणियों के बाधित बालकों हेतु लचीली शिक्षा व्यवस्था का प्रबंध किया तथा शारीरिक रूप से बाधित की शिक्षा हेतु नीतियों के अंतर्गत प्रशिक्षण कार्यक्रमों की महत्वपूर्ण एवं तकनीकी विधियों के क्षेत्र में विकास करने पर बल दिया।
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