UNDERSTANDING SOCIAL AND ENVIRONMENTAL ISSUES AND LOCAL CULTURE (HINDI MEDIUM)
SOCIAL ISSUES (सामाजिक समस्याएं )
आज भारत में बहुत सामाजिक समस्याएं हैं जिसका कारण अनेक सामाजिक कुरीतियां है यह सामाजिक कुरीतियां समाज की स्थिति को बुरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है आज समाज में फैली हुई कुरीतियों के कारण सामाजिक स्थिति दिनोंदिन खराब होती जा रही है जिससे पूरा समाज का ढांचा छिन्न-भिन्न हो गया है आज भारत एक बड़ी संख्या में सामाजिक समस्याओं से घिरा है इसमें से कुछ सामाजिक समस्याएं इस प्रकार है :---
*जाति व्यवस्था
* गरीबी
*बाल श्रम
*बाल विवाह
*निरक्षरता
*लिंग असमानता
*दहेज प्रथा
*सती प्रथा
*नशाखोरी
* धार्मिक समस्याएं
जाति व्यवस्था
जाति व्यवस्था एक ऐसी प्रथा है, जो व्यक्ति को जन्म के अनुसार विभिन्न वर्गों में बांटती है। भारत में प्रत्येक जाति के विभिन्न व्यवसाय भी निर्धारित हैं, प्रत्येक जाति निर्धारित व्यवसाय को ही अपनाती है, इसके अतिरिक्त अन्य व्यावसाय को अपनाना बाध्य हैं।
भारत में जाति व्यवस्था 4 वर्गों में विभाजित है:---
1)- ब्राह्मण
यह सबसे उच्च वर्ग है यह वर्ग मुख्यता धार्मिक क्रियाकलाप में व्यस्त रहते हैं राजा के समक्ष एक सलाहकार के रूप में कार्यरत रहते थे। तथा शिक्षक का कार्य भी प्राय: यह वर्ग ही करता था।
2)-- छत्रिय
यह वर्ग युद्ध के कार्यों को करते थे ।
3)--वैश्य
यह व्यावसायिक वर्ग है पराया कृषि व्यवसाय अधिकारियों को यह करते थे
3)-- शूद्र
यह वर्ग सबसे निम्न श्रेणी में रखा गया है। प्रायः यह वर्ग मजदूरी एवं सफाई के कार्यों को करता था।
जाति व्यवस्था के नकारात्मक प्रभाव
* छुआछूत को बढ़ावा
* असमानता को बढ़ावा
*रूढ़िवादिता को बढ़ावा
*हीन भावना को बढ़ावा
*उच्च एवं निम्न वर्ग के बीच दूरी
जाति व्यवस्था ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय दूरी को बढ़ाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। तथा छुआछूत, बाल विवाह ,सती प्रथा, बाल श्रम जैसी सामाजिक बुराइयों को बढ़ावा दिया है।
सुझाव
*शिक्षा ही एक ऐसा माध्यम है जो व्यक्ति को सोच को बदल सकती है, जाति व्यवस्था की कमियों को समाज के समक्ष प्रस्तुत कर सकती है ।
*सभी मनुष्य समान है, वर्ग के आधार पर किसी भी व्यक्ति को उचित तथा निम्न श्रेणी में निर्धारित करना गलत है, शिक्षा के द्वारा ही यह बात लोगों द्वारा बताई जा सकती है।
*सभी वर्ग के बच्चों को शिक्षा प्राप्ति का समान अधिकार है न की किसी विशेष वर्ग का।
*बच्चों को नैतिक शिक्षा दी जाए, बच्चों को सब के साथ खेलने, खाने व पढ़ने के लिए प्रेरित किया जाए।
* विभिन्न सामाजिक समस्याएं बाल श्रम, बाल विवाह, दहेज प्रथा, सती प्रथा आदि की समस्याओं को शिक्षक द्वारा छात्रों को बताया जाए तथा से दूर करने के उपाय बताए जाए। यह समस्याएं समाज की प्रगति के लिए बाधक है, अतः इन्हें दूर किया जाना आवश्यक है।
निर्धनता
निर्धनता के अंतर्गत वह वर्ग आता है, जो अपनी मौलिक आवश्यकता रोटी, कपड़ा, और मकान को भी पाने मे असक्षम हो। निर्धनता के कारण जीवन यापन करना कठिन हो जाता है । प्रति व्यक्ति आय इतनी कम हो जाती है कि समाज की आर्थिक व्यवस्था पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है।
कारण
गरीबी का मुख्य कारण अशिक्षा है, अशिक्षा और गरीबी एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। यह गरीबी के कारण व्यक्ति अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा नहीं दे पाते हैं तथा अशिक्षा के कारण ही गरीबी जन्म देती है। अशिक्षित व्यक्ति एक और तो कोई व्यवसाय या अच्छी नौकरी नहीं कर पाता है तो दूसरी ओर जागरूकता की कमी भी रहती है जिसे वह बहुत ही निम्न स्तर का जीवन व्यतीत करता है। जिसके कारण समाज की प्रगति में बाधा आती है।
* गरीबी बढ़ने का कारण बढ़ती हुई जनसंख्या भी है। जनसंख्या वृद्धि के कारण प्रत्येक व्यक्ति को उसकी योग्यता व क्षमता के अनुसार कार्य नहीं मिल पाता है उसका स्तर गिरता चला जाता है ।
*देश की निम्न आर्थिक व्यवस्था के कारण भी गरीबी को बढ़ावा मिल रहा है। व्यक्ति को उसकी योग्यता, क्षमता को बढ़ाने के उचित अवसर नहीं मिल पाते हैं, और निर्धनता को बढ़ावा मिलता है।
* प्राकृतिक एवं वातावरण भी निर्धनता को बढ़ावा देते हैं । जैसे :-- अधिक बारिश, बीमारी, प्राकृतिक प्रकोप आदि
प्रभाव
*निर्धन व्यक्ति सदेव जीवन यापन के लिए दूसरों पर निर्भर रहता है।
*उचित खान-पान ना मिल पाने के कारण अच्छे स्वास्थ्य की भी समस्या रहतीं है।
*व्यवसाय के चुनाव में कमी रहती है।
* कठिन जीवन ।
*अशिक्षा में बढ़ोतरी
सुझाव
*गरीब व्यक्ति को उनकी योग्यता के अनुरूप अधिक से अधिक कार्य दिए जाएं।
* प्रौढ़ शिक्षा कार्यक्रम चलाया जाए ।
*व्यवसाय के शिक्षण दिए जाएं।
*उनके बच्चों को निशुल्क शिक्षा दी जाए ।
*सरकार द्वारा समय-समय पर उन्हें आर्थिक सहायता प्रदान की जाए ।
*गरीब परिवार की स्त्रियों को छोटे छोटे लघु उद्योगों में शामिल किया जाए।
बाल श्रम
बाल श्रम के अंतर्गत वह बच्चे हैं जिनकी आयु 14 वर्ष से कम होती है। वे परिवार को आर्थिक आय को बढ़ाने हेतु कार्य करते हैं। दु:खद बात यह है कि ये आयु उनकी खेलने व पढ़ने की है और वे श्रम करते हैं। आज भारतीय समाज में एक बहुत बड़ा वर्ग है, जो अपने बच्चों से श्रम करवाता है।
कारण
*बेरोजगारी
*गरीबी
*निरक्षरता
*जीवन स्तर का निम्न होना
भारतीय समाज में उपर्युक्त समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। बेरोजगारी, गरीबी ,निरक्षरता के कारण बाल श्रम जैसी सामाजिक मुद्दे एवं समस्याएं बढ़ रहे हैं ।परिवार का आकार बड़ा है। एक व्यक्ति पूरे परिवार का पालन पोषण करने में सक्षम नही है। अतः वह भी अपने बच्चों को कम आयु से ही रोजगार करवाने पर मजबूर हो जाते हैं। बच्चे अल्पायु से कार्य करने लगते हैं जिससे वे शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। अतः निरक्षरता की समस्या बढ़ती है। शिक्षा प्राप्त ना करने के कारण यही समस्या बड़े होने पर उनके सामने आ जाती है और वे भी अपने बच्चों को रोजगार करवाते हैं अतः गरीबी निरक्षरता बेरोजगारी वाली समस्याएं एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंची रहती हैं। और उनका जीवन स्तर सदैव निम्न हीं बना रहता है।
प्रभाव
*बाल श्रम के कारण बच्चे स्कूल पढ़ने नहीं जा पाते हैं ।
*बाल श्रम के कारण बच्चों का बचपन समाप्त हो जाता है।
* बच्चे किसी भी समाज का भविष्य होते हैं जिस प्रकार मज़बूत स्तंभ पर ही मजबूत इमारत खड़ी रह सकती है उसी प्रकार मजबूत बच्चे ही एक मजबूत समाज का निर्माण करते हैं अतः बाल श्रम देश के विकास को अवरुद्ध करता है।
सुझाव
*माता-पिता को यह जानकारी देनी होगी कि बच्चों को शिक्षित करें, इससे उनकी आय अधिक बढ़ेगी।
* सरकार को बाल श्रम उन्मूलन हेतु बड़े कदम उठाने चाहिए ।
*गरीब परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान की जानी चाहिए।
* बच्चों को निशुल्क शिक्षा दी जाए।
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