CREATIVE EXPRESSION BY DRAMA(HINDI MEDIUM)

 INTRODUCTION:---

व्यक्ति अपने जीवन में प्रतिदिन सामाजिक एवं नैतिक समस्याओं से गुजरता है, नाटक के माध्यम से  समस्याओं को अपने शब्दों के माध्यम से कहकर या लिखकर प्रकट करता है ,नाटक न केवल व्यक्ति के व्यक्तित्व का विकास करता है ,अपितु छात्रों को अपने आप अनुभव एवं सृजनात्मकता को भी बढ़ावा देता है। 

सर्वे द्वारा ज्ञात हुआ है कि विभिन्न नाटकों में भागीदारी से छात्रों में आत्म विकास को बढ़ावा मिला है। रचनात्मक विकास और सृजनात्मक विकास को बढ़ावा मिला है।  आश्चर्यजनक बात यह है कि छात्रों की लेखन शक्ति में भी सकारात्मक प्रभाव पड़ा है, छात्र में अपने विचारों को व्यक्त करने, भाषा का विकास, अपनी भावनाओं को प्रकट करने तथा संवेग  नियंत्रण की शक्ति का विकास हुआ है ।

      विभिन्न नाटकों को पुस्तकों के माध्यम से कक्षाओं में पढ़ाया जाना चाहिए अधिक से अधिक अध्ययन करने से छात्रों में सृजनात्मकता का विकास होता है शिक्षकों द्वारा कक्षाओं में बच्चों को नाटक को बार-बार पढ़ाया जाना चाहिए तथा बाद में प्रश्नों के माध्यम से यह जानकारी ली जानी चाहिए ,कि छात्रों ने इस नाटक से क्या सीखा तथा छात्रों को अपने शब्दों में इसे लिखने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए इससे छात्रों के संरचनात्मक विकास को बढ़ावा मिलेगा तथा सृजनात्मक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। उनमे    दूसरों के सम्मुख अपनी बात कहने की क्षमता का विकास होगा।  छात्र अपने जीवन में इसे कैरियर के लिए भी अपना सकते हैं।

EDUCATIONAL OBJECTIVES

*कल्पनाशीलता और रचनात्मकता को विकसित करना 

*महत्वपूर्ण सोच और समस्या को सुलझाने के कौशल को बढ़ावा देना 

*विचारों का अन्वेषण करना और मूल्यांकन करना

* संघर्ष के साथ निपटने के सकारात्मक तरीकों की खोज

* भावनाओं को व्यक्त करना और उनकी भावनाओं की व्याख्या करना

* संचार कौशल को बढ़ाना

* नाटक गतिविधियों में भागीदारी के साथ साक्षरता कौशल शिक्षण में सुधार ,छात्र का मूल्यांकन करने के लिए एक और तरीका प्रदान करता है  नाटक के माध्यम से छात्रों के विचारों को व्यवस्थित करने समस्याओं को हल करने ,एक समूह में काम करने ,संघर्ष को सुलझाने और उनका निरीक्षण किया जा सकता है कक्षाएं एवं अनुप्रयोगों के मूल सामग्री का अनुभव ,व्याख्या, समझ और विश्लेषण करने के तरीके विकसित किए जाते हैं

IMPORTANCE 

*कल्पनात्मक विकास:----

 ज्ञान को बढ़ावा देने के लिए कल्पना का होना परम आवश्यक है इससे छात्रों का छात्रों की कल्पनाशीलता का विकास होता है 

*सहानुभूति:--

 नाट्यरूप प्रस्तुत करने के लिए विभिन्न पहलुओं से गुजरना पड़ता है वेशभूषा संस्कृति एवं हाव-भाव विचारों को प्रस्तुत करना पड़ता है इससे बालकों में सहानुभूति का विकास होता है 

*नए विचारों का विकास :----

इससे नए विचारों एवं अभिक्षमता ओं का विकास होता है जिसके कारण छात्रों में विचार विमर्श करने की क्षमता विकसित होती है 

*एकाग्रता :----

इसके माध्यम से बौद्धिक एकाग्रता का विकास होता है जो भविष्य के लिए लाभकारी है

* वैचारिक  कौशल का विकास:----

  छात्रों में शाब्दिक एवं अशाब्दिक विचारों एवं भावों को व्यक्त करने की क्षमता का विकास होता है

* संवेग का विकास:---

 छात्रों में अपने संबंधों की स्थिरता का विकास होता है वे अपने व्यवहारों को समय के अनुसार नियंत्रित कर लेते हैं

* शारीरिक क्षमता का विकास:---

 नाटक में शरीर अनेक क्रियाकलाप करता है जिससे छात्रों की शारीरिक क्षमता का विकास होता है

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