CLASSROOM WITHOUT FOUR WALL (HINDI MEDIUM)

  INTRODUCTION:---

   दीवार विहीन कक्षाएं अपने नामकरण से ही स्वयं के आशय को स्पष्ट करती हैं ,यह कक्षाएं वह होती हैं ,जहां चाहरदीवारी  नहीं होती है। दीवार विहीन कक्षाएं खुले परिवेश में स्वतंत्रता पूर्वक संचालित की जाती हैं। इस में चारों तरफ कोई अवरोध नहीं होता है। यह कक्षाएं मुक्त रूप से चलाई जाती हैं।

 प्राचीन काल में इन कक्षाओं के माध्यम से ही ऋषि मुनियों आदि का शिक्षा ग्रहण करने का अवसर प्राप्त होता था।

 वर्तमान समय में भी शैक्षिक वातावरण को स्वतंत्र अनुकूल बनाने के लिए अनेक ऐसे कदम उठाए जा रहे हैं।जिसमें  अधिगम प्रक्रिया को सरल व सहजता का रूप दिया जा सके। 

  दीवार रहित कक्षाएं खुले वातावरण में चलाई जाती हैं।  इसमें जगह-जगह शांति प्रिय  तरीके से कक्षा कक्ष का आयोजन करके पर्यावरण से संबंधित ज्ञान छात्रों को प्रदान किए जाते हैं, उन्हें जीवन जीने के ढंग,व्यवसाय एवं ऐतिहासिक तथ्यों से अवगत कराया जाता है।इससे छात्र वास्तविक दुनिया से परिचित होते हैं।

OBJECTIVES OF CLASSROOM WITHOUT FOUR WALL 

दीवार रहित कक्षाओं के मुख्य उद्देश्य हैं:----बालकों को खुले वातावरण में स्वतंत्र रूप से सामाजिक परिवेश, जागरूकता तथा वास्तविक स्थितियों से परिचित कराना ।जिससे छात्र वर्तमान की आवश्यकताओं के अनुसार अपने को ढाल सकें।

CHARACTERISTICS:--

*इन कक्षाओं में एवं दूरस्थ शिक्षा में समानता पाई जाती है।

 *इन कक्षाओं में लाइव क्लासरूम तथा आडियो वीडियो के माध्यम से शिक्षा दी जाती है। 

*यह कक्षाएं  छात्राओं को एक ऐसा वातावरण प्रदान करती है जिससे छात्र स्वतंत्र रूप से सीखते हैं ।

*यह कक्षाएं विभिन्न तकनीकी  विधियों पर आधारित  होती हैं।

* यह कक्षाएं ऑनलाइन भी चलती हैं। 

 *छोटे-छोटे समूह या व्यक्तिगत रूप से छात्र छात्राओं को शिक्षा दी जाती है। 

* विभिन्न असाइनमेंट तथा सेमिनार के माध्यम से शिक्षा दी जाती है। 

* यह वह कक्षाएं हैं जिनमें छात्र-छात्राएं  ई बुक एवं 3D मॉडल के माध्यम से शिक्षा ग्रहण करते हैं।

*यह  वह कक्षाएं हैं जो ट्यूटोरियल प्रणाली के माध्यम से संपादित की जाती हैं।  

*इनमे  विभिन्न दूरदर्शन तथा अन्य माध्यमों द्वारा शिक्षा दी जाती है। 

DIFFERENCE BETWEEN GENERAL CLASSROOM AND CLASSROOM WITHOUT FOUR WALL 

1)-सामान्यता कक्षा शिक्षण पद्धति अपनाई जाती हैं।

1)- सामान्यतः जन शिक्षण पद्धति अपनाई जाती है।

2)- इस पद्धति द्वारा शिक्षक प्रत्यक्ष रूप से शिक्षा देते हैं, शिक्षक एवं छात्र के मध्य अंतर संबंध होते हैं।

2)- शिक्षक द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से शिक्षा दी जाती है अतः छात्र एवं शिक्षक के मध्य संबंध प्रायः नहीं होते हैं।

3)- छात्रों को पाठ्यक्रम पूर्ति तक कक्षाओं में उपस्थित होना पड़ता है।

3)- इस पद्धति द्वारा छात्र-छात्राएं घर में रहकर शिक्षा ग्रहण करते हैं।

4)- इस पद्धति में शिक्षक अपनी कक्षाओं को आवश्यकता अनुसार लेता है ।

4)- इसमें छात्र अपनी क्षमताओं के अनुसार शिक्षा प्राप्त करता है।

5)- इसमें पाठ्यक्रम को पूरा करने का एक निश्चित समय निर्धारित होता है प्रायः यह समय 1 वर्षीय होता है।

5)- इसमें पाठ्यक्रम को पूरा करने का कोई समय निर्धारित नहीं होता है। छात्र अपनी क्षमताओं, योग्यताओं तथा समय अनुसार पाठ्यक्रम को पूरा करते हैं।

6)- इसमें शिक्षक द्वारा मौखिक रूप से प्रत्यक्ष तरीके से शिक्षा दी जाती हैं।

 6)-इसमें ऑडियो वीडियो तथा अन्य तकनीकी के माध्यम से शिक्षा ग्रहण करते हैं।

7)- इस पद्धति में शिक्षक छात्रों की समस्याओं का तुरंत समाधान कर देते हैं ।

7)-इस पद्धति में तुरंत समस्याओं का समाधान नहीं हो पाता है।

Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

Local Culture(Meaning, Features, Method and Techniques)

INNOVATION

INNOVATIVE CLASS ROOM (HINDI MEDIUM)