होशंगाबाद विज्ञान शिक्षण प्रोजेक्ट
होशंगाबाद विज्ञान शिक्षण प्रोजेक्ट किशोर भारती के द्वारा सन 1972 में प्रारंभ किया गया वर्तमान समय में यह मध्य प्रदेश के लगभग 14 जिलों के 600 विद्यालयों में चल रहा है लगभग 1500 अध्यापकों के द्वारा लगभग 100000 छात्र इस प्रोजेक्ट के पाठ्यक्रम को प्रत्येक वर्ष अध्ययन करती हैं । यह प्रोजेक्ट कक्षा 6 से 8 तक की विज्ञान शिक्षा के सुधार पर बल देता है रटने पर बल देने वाली विधियों के विपरीत यह प्रोजेक्ट खोज द्वारा सीखना, क्रिया द्वारा सीखना तथा वातावरण के द्वारा सीखने को स्थान देता है यह विज्ञान शिक्षण की ऐसी प्रक्रिया पर बल देता है जो छात्रों में वैज्ञानिक अभिवृद्धि विकसित कर सके तथा छात्रों को विश्वास युक्त एवं अधिगमकर्ता तथा ज्ञान का सृजन करता बना सकें।
प्रोजेक्ट के उद्देश्य
1)-विद्यालय विज्ञान शिक्षण में संशोधन:--
इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य विज्ञान शिक्षण को सार्वभौमिक रूप से स्वीकार राष्ट्रीय शैक्षिक उद्देश्यों की पूर्ति केे योग्य बनाना है इसके लिए यह विज्ञान पाठ्यक्रम को दैनिक जीवन के विज्ञान व तकनीकी संबंधी अनुभव से संबंधित करने पर बल देता है। 2)-नवा चारों को प्राथमिकता देना:--
केवल कुुछ ही विद्यालयों में नवाचार का प्रयोग ना करके यह प्रोजेक्ट ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी विद्यालयों मे भी नवाचाार के प्रयोग पर बल देती है।
3)-शिक्षकों को सशक्त करना :--
यह प्रोजेक्ट शिक्षकों के अकादमी प्रशासकीय और बौद्धिक सशक्तिकरण पर बल देता है क्योंकि यह कक्षा स्तर पर सुधार लाने के लिए अत्यंत आवश्यक है ।
4)-प्रशासकीय विकेंद्रीकरण पर बल:--
ब्लॉक स्तर के माध्यमिक विद्यालयों को उपयोग करते हुए यह प्रोजेक्ट क्षेत्र स्तर पर क्रियान्वयन के विकेंद्रीकरण पर बल देता है ।
5)-उच्च शिक्षा के संस्थानों की सहभागिता लेना:--
यह प्रोजेक्ट यह विश्वास रखता हैै कि विद्यालई शिक्षा व्यवस्था सुधाार लाने के प्रयासों में उच्च शिक्षा ,वैज्ञानिकों ,अनुसंधानकर्ता का भी योगदान आवश्यक है।
6)-गैर सरकारी समूह की भूमिका पर बल:--
यह प्रोजेक्ट राज्य शिक्षा विभाग और गैर सरकारी समूह की एक साथ कार्यकारिणी व्यवस्था का आदर्श उदाहरण है।
प्रोजेक्ट की मुख्य विशेषताएं
1) बाल वैज्ञानिक पुस्तकें :-
यह पुस्तकें प्रत्येक कक्षा 6 7 8 के लिए 1-1 हैं।
यह पुस्तकें खोज सिद्धांतों पर आधारित है।
इन पुस्तकों की डिजाइन को आकर्षक बनाया गया है ।
इन पुस्तकोंं को क्षेत्र परीक्षण केे द्वारा छात्रों व शिक्षकों का पृष्ठ पोषण फीडबैक लेकर बनाया गया है ।
इन पुस्तकों को एमपी कारपोरेशन के द्वारा सन 1978 से प्रकाशित किया जा रहा है।
2) शिक्षक प्रशिक्षण:--
प्रत्येक शिक्षक को 3 प्रशिक्षण करनी होती हैं प्रत्येक प्रशिक्षण एक कक्षा के लिए 3 सप्तााह का होता है इस प्रशिक्षण में :---
*शिक्षकों को बाल वैज्ञानिक पुस्तकों के सभी प्रयोग व क्रियाएं करनी होती हैं।
*शैक्षिक बोध हेतु विचार विमर्श किया जाता है ।
*मूल्यांकन विधियों से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाता है ।
3)-संसाधन समूह:--
संसाधन समूह की गुणवत्ता ,प्रेरणा और उत्तरदायित्व का ,प्रोजेक्ट की उपलब्धि का एक महत्वपूर्ण कारक है इसका कार्य है :--
*बाल वैज्ञानिक पुस्तकों का विकास व सुधार
*शिक्षकों का प्रशिक्षण कार्य,
*मासिक सभा का आयोजन ,
*टेस्ट पेपर तैयार करना,
*मूल्यांकन दिशानिर्देश तैयार करना
*विभिन्न राज्यों में कार्यशालाओं का आयोजन आदि है।
4)-किट:--
इस प्रोजेक्ट में छात्रों के लिए चार के समूह में प्रयोग करने के लिए एक किट बनाई गई है 40 छात्रों की कक्षा के लिए एक किट लगभग 4000 की होती है इस किट के अतिरिक्त भी छात्र विभिन्न्् प्रयोगो में वातावरण या आसपास से भी सामग्री एकत्रित करते हैं।
5)-मासिक सभा:--
विद्यालय परिस्थितियों में शिक्षकों की सहायता करने हेतु तथा समूह अंतः क्रिया को प्रोत्साहित करने हेतु विभिन्न मासिक सभाओं का आयोजन किया गया जाता है, इन सभाओं में लोग अपने अनुभव बांटते हैं, समस्याओं पर चर्चा करते हैं तथा संसाधन शिक्षक कुछ विषयों पर भाषण देते हैं।
6)- परीक्षा एवं मूल्यांकन:--
कार्यक्रम केेेे उद्देश्यों के अनुसार मूल्यांकन व्यवस्था रखीजाती है जैसे:--
*लिखित व क्रियात्मक परीक्षा
* लिखित परीक्षा का रूप खुली पुस्तक
*परीक्षा का लक्ष्य तार्किक कौशलों की जांच करना
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