बनस्थली विद्यापीठ यूनिवर्सिटी
प्रस्तावना, इतिहास, सुविधाएँ, समय सारणी, मूल्यांकन पद्धति, अतिरिक्त कार्य योजनाएं, विभिन्न विभाग और नवाचार
वनस्थली विद्यापीठ संरक्षित क्षेत्र की महिला विश्वविद्यालय में से एक है। यह एक ऐसा विश्वविद्यालय है जहां एक और विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था उपलब्ध है और दूसरी ओर स्नातक परास्नातक और शोध कार्य के कई कार्यक्रम उपलब्ध है ।वनस्थली विद्यापीठ में छात्रावास की पूर्ण व्यवस्था है और प्राथमिक शिक्षा से पीएचडी स्तर तक की शिक्षा दी जाती है। यहाँ का छात्रावास बहुत बड़ा है विश्व में सबसे अधिक संख्या में रहने की व्यवस्था महिलाओं के लिए इस विश्वविद्यालय में ही उपलब्ध है।
इतिहास: - वनस्थली विद्यापीठ की 6 अक्टूबर 1935 में स्थापना हुई। प्रवासी लोकतंत्र सेनानी पंडित हीरालाल शास्त्री और उनकी पत्नी श्रीमती रतन शास्त्री ने इस विश्वविद्यालय की शुरुआत की। इस विद्यापीठ को खोलने का उद्देश्य महिलाओं को शिक्षित करना और उनकी दशा में सुधार करना था। शुरू में यह संस्था महिलाओं के सुधार हेतु चलाई गई .1983 में इसमें एक विश्वविद्यालय का रूप लिया।
वनस्थली विद्यापीठ की विशेषताएं
* शारीरिक
* सौन्दर्य दक्षता
* क्रियात्मक
* नैतिक
* बौद्धिक
शारीरिक विकास: - इसके अंतर्गत कई शारीरिक अंगों जैसे परेड, शूटिंग, पटवारी, उड़ान, तैरना, योगा और अंधानेक पारंपरिक और आधुनिक खेल जैसे कबड्डी खो-खो बास्केटबॉल बैडमिंटन आदि सम्मिलित है।
सौन्दर्यात्मक विकास: - इटेय के अंतर्गत कक्षा 1 से 5 तक छात्राओं को संगीत और चित्रकला की शिक्षा दी जाती है
क्रियात्मक विकास: - क्रियात्मक शिक्षा के अंतर्गत प्रिंटिंग क्राफ्ट आदि सम्मिलित है। घरेलू शिक्षा के अंतर्गत छात्राओं को मंजूरी, धुलाई, श्रमदान करना सिखाया जाता है।
नैतिक विकास: --- इसका लक्ष्य सभी धर्मों के प्रति भावनाओं की भावना विकसित करनाा है जिसके लिए साप्ताहिक प्रार्थना, गीता, वेद और रामायण का पाठ किया जाता है।
बौद्धिक विकास : - बौद्धिक विकास के लिए छात्राओं को प्रारंभ से ही विज्ञान के साथ प्राकृतिक व सामाजिक ज्ञान और भाषा तथा गणित ज्ञान जाता है।
बनस्थली विद्यापीठ के लक्ष्य
सर्वतोमुखी विकास:---- गृह शिल्प, गृह प्रबंध और गृह व्यवस्था का कार्य ,ललित कलाओं और उद्योगों का शिक्षण, शारीरिक व्यायाम की शिक्षा देने की व्यवस्था है, इस विषय में लिखा है:----
" हमारी योजना बालिकाओं को सर्वतोमुखी शिक्षा प्रदान करना है जिससे वे सुयोग्य भारतीय नारी बन सके"
चारित्रिक विकास:--- बालिकाओं का चारित्रिक विकास करने के लिए सार्वजनिक जीवन व्यतीत करने की प्रवृत्ति भारतीय आदर्शों का अनुपालन ,निडरता और वीरता एवं साहस की प्रवृत्ति उत्पन्न करना इस विद्यापीठ का मुख्य लक्ष्य है
मर्यादा निहित स्त्री स्वतंत्र की भावना का विकास:-- विद्यापीठ में भारतीय स्त्री मर्यादा को मुख्य स्थान दिया गया है और पाश्चात्य संस्कृति के आधार पर उपयुक्त मर्यादा में रहते हुए जीवन व्यतीत करने का अवसर दिया जाता है। विद्यापीठ का लक्ष्य है की भारतीय नारी निडर होकर पुरुषों के साथ कंधा मिलाकर काम करने वाली हो स्वतंत्र हो ,परंतु भारतीय स्त्री मर्यादाओं से अनुबंध हो।
स्वालंबन की भावना का विकास:---विद्यापीठ में सामुदायिक विकास योजनाओं द्वारा छात्राओं को सहयोग ,सहकारिता और स्वालंबन के गुण अर्जित करने का अवसर दिया जाता है।
विद्यापीठ की समय सारणी
विद्यापीठ में छात्राएं न्यूनतम 8 घंटे शैक्षिक एवं व्यवहारिक कार्य करती हैं कार्य विभाजन इस प्रकार है:-----
कुल 8 घंटे-----
4 घंटे बौद्धिक शिक्षा
2 घंटे प्रायोगिक व व्यवहारिक शिक्षा
1 घंटा शारीरिक शिक्षा
एवं
1घंटा कला साहित्य नैतिक शिक्षा
परीक्षा पद्धति व मूल्यांकन व्यवस्था
मूल्यांकन मैं दैनिक कार्य को अधिक महत्व दिया जाता है अधिकांशता व्यवहारिक परीक्षा पर बल दिया जाता है।
अतिरिक्त कार्य योजनाएं
इन योजनाओं में सांस्कृतिक महत्व के कार्यक्रमों को महत्व दिया जाता है कुछ कार्यक्रम इस प्रकार हैं:---
*पर्व एवं त्योहारों को मानना
*बाल मेला
*विभिन्न विषयात्मक परिषद एवं गोष्ठियों
*छात्र संसद और वाद-विवाद
*सरस्वती यात्राएं
*समाज संपर्क व समाज सेवा
*सामूहिक ज्ञान
* विविध कलात्मक प्रतियोगिताएं
विद्यापीठ के शिक्षा विभाग
वनस्थली विद्यापीठ के विभागों को इस प्रकार विभाजित किया गया है:----
*प्रारंभिक एवं संस्कृत विभाग
*माध्यमिक शिक्षा विभाग
*बहुउदेशीय माध्यमिक शिक्षा विभाग
*स्नातक तथा उत्तर स्नातक शिक्षा विभाग
प्रारंभिक एवं संस्कृत विभाग:-- इसमें जूनियर हाई स्कूल कक्षा 8 तक की शिक्षा दी जाती है ,5 वर्ष की प्राथमिक शिक्षा और 3 वर्ष की निम्न माध्यमिक शिक्षा दी जाती है ।
माध्यमिक शिक्षा विभाग:-- कक्षा 8 केेेे बाद छात्राएं हाई स्कूल (2 वर्षीय पाठ्यक्रम) अथवा हायर सेकेंडरी (3 वर्षीय) पाठ्यक्रम में जा सकती हैं।
बहुउद्देशीय माध्यमिक शिक्षा विभाग:--- इसमेंं नवी कक्षा से लेकर 11वीं कक्षा तक बहुउद्देशीय रुचिकर विषयों में शिक्षा दी जाती है बाद में 3 वर्षीय डिग्री पाठ्यक्रम होोता है।
स्नातक तथा उत्तर स्नातक शिक्षा विभाग:-- हाई स्कूल उत्तीर्ण करके इंटर ,तत्पश्चात विभिन्न विषयों मैं बीए , बीएससी करके एमए ,एमएससी करती है ।
इस प्रकार वनस्थली विद्यापीठ अपनी पंचमुखी शिक्षा के द्वारा छात्राओं को स्वावलंबी ,आत्मविश्वासी एवं चरित्रवान बनाने वाला एक सर्वोत्तम संस्थान है।
नवाचार :---- बनस्थली विद्यापीठ केे कार्य को देखते हुए नैक की टीम ने इस विश्वविद्यालय कार्य की प्रशंसाा की तथा सबसे उच्च अंक देते हुए इसी ए ग्रेड प्रदान किया ।सन 2011 में एचआरडी तथा टंडन कमेटी ने इसके कार्यों एवं योगदान की प्रशंसाा की। विद्यापीठ में विद्यार्थियों की प्रगति की ओर विशेष ध्यान दिया जाता है तथा शैक्षिक अभिक्षमताओं, शोध कार्यों को बढ़ावा दिया जाता है।जिससेे छात्र वर्तमान एव भावी जीवन में प्रगति करें। विश्वविद्यालय के कार्यों एवं योगदान को देखते हुए 2010 ने सबसे अच्छे संस्थानों में से एक माना गया तथा ए श्रेणी मेंं रखा गया ।विश्वविद्यालय के महत्वपूर्ण कार्यों एवं सुव्यवस्था के कारण ही विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने 1983 में इसे विश्वविद्यालय का रूप देने का परामर्श दिया ।विश्वविद्यालय बनने के बाद वनस्थली विद्यापीठ वनस्थली विश्वविद्यालय के नाम से जाना जाने लगा। विद्यापीठ में पुनः विश्वविद्यालय के रूप में स्नातक परास्नातक कोर्ट का आरंंभ किया तथा अन्य कोर्स की फिर से शुरुआत की जिसमें कंप्यूटर साइंस शोोध कार्य बायोटेक्नोलॉजी ,शिक्षक व शिक्षा आदि। सर्वप्रथम नए कोर्स में एमएससी केमिस्ट्री तथा बायोलॉजी के विभिन्न भाग वनस्थली विश्वविद्यालय में ही शुरू किए गए। प्रोफेशनल कोर्स जैसे एमबीए, एमसीए तथा अन्य विज्ञाान विषयों मैं परास्नातक कोर्स को लाने में वनस्थली विश्वविद्यालय की भूमिका सर्वोपरि है सर्वप्रथम सेमेस्टर विधि द्वारा पढ़ाए जाने की व्यवस्था इस विश्वविद्यालय द्वारा ही की गई ।सन 2004 से सामाजिक विषय, गृह विज्ञान आदि कोर्स भी सेमेस्टर द्वारा पढ़ाए जा रहे हैं ।बनस्थली विद्यापीठ भाारत का प्रथम विश्वविद्यालय है जिसने महिलाओंं के ट्रेनिंग एवं शोध कार्य हेतु आर्थिक अनुदान की व्यवस्था की तथा विभिन्न आर्थिक अनुदानो की व्यवस्था करके फ्री वर्कशॉप ई लर्निंग तथा शोध हेतु पेपर पब्लिश करनेे की व्यवस्था की। जिससे महिलाओंं को अपनी शिक्षा को आगे बढ़ाने में कोई कठिनाई ना हो तथा एमबीए, बीबीए एवं पी एच डी जैसे महंगेे कोर्स करनेेे के लिए महिलाएं आर्थिक कठिनाइयों के कारण पीछे ना रह जाए। सन 2012 में भारत में समस्त विद्यालयोंं का नेल्सन द्वारा एक सर्वे किया गया जिसमें विद्यापीठ को प्रथम श्रेणी प्रदान की गई महिलाओं की शिक्षा की उपयुक्तत व्यवस्था रहने की व्यवस्था के कारण यह विश्वविद्यालय पूरे विश्वव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है । इस विश्वविद्यालय की एक विशेषता यह भी है कि यह 850 एकड़ में फैला है तथा नर्सरी से पीएचडी कोर्स की समस्त व्यवस्थाएं उपलब्ध है भारतीय संस्कृति को इस विश्वविद्यालय में सदैव महत्त्व्व दिया गया। वनस्थली विद्यापीठ के समक्ष अन्य कोई विश्वविद्यालय वर्तमान समय में उपलब्ध नहींं है।
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